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ख़फ़ा


गर आप भी हो गए ख़फ़ा,तो किधर जाएँगेकिसे करेंगे नाराज़और फिर किसे मनाएँगे

हर ज़ुल्म को,उस रब के,सहा हे हँसकर..तेरे रूठने के ग़म से,शायद ना उभर पाएँगे

तेरे रूठने के ग़म से,शायद ना उभर पाएँगे

— मृदुल
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