ज़िंदगी तो बस 

जीने का नाम है.. 

दिन यादों में काटना 

यही अपना काम है..


अगर यही है ज़िंदगी 

तो क्यों ना हँस कर काटे इसे..

हँसी में ही है सफलता 

आओ मिलकर बाँटे इसे..


ज़िंदगी को आख़िर 

रोकर क्यों जियें हम?

जब रोना हमें 

मौत पर भी है..


इसीलिए मेरी इल्तिजा है दोस्तों..

जीना हमें हँस कर ही है..

जीना हमें हँस कर ही है..

-मृदुल