पलकों के साये मैं रेहते थे हम तो..
तुमने जो आँसु बहाए, ओ जानम..
आँसु की धारा मैं बह गए है हम तो..
तिनकों ने बचाया ना हमको, ओ जानम..
इन्ही आँसुओं के समंदर में डूबा..
ना साहिल कहीं ना किनारा, ओ जानम..
हमें याद करके बहाना ना आँसु..
रहेंगे तुम्हारे सदा हम, ओ जानम..
लोगों से क्या हम? किस मुँह से कहते?
तुमने ही हमको भुलाया, जो जानम..
राहों में तेरी ना फिर आ खड़े हो..
गला ख़्वाहिशों का मरोड़ा, ओ जानम..
सितमग़र, सितमकर, ना ग़म कर तू मुझ पर..
है अपनी ही राहों को मोड़ा, ओ जानम..
जी ही रहे थे, हम जी ही लेंगे..
मगर अब तुम्हारे बिना हम, ओ जानम..
-मृदुल

