हारने का हुनर..
ख़ुद हार भी
सिखला ना सकी..
जीत जाऊँ मैं जिसे...
ऐसी मंज़िल
आ ना सकी..
साक़ी ने दिया..
जामे-ज़िंदगी
भर कर..
मगर जामे शोख़ियाँ...
हमें..
बहका ना सकी..
ज़िंदगी ने कभी..
कोई कसर..
ना छोड़ी थी शायद..
मगर ये होसला ही है की..
वो हमें..
आज तक.. हरा ना सकी..
मेरे दोस्त..
मगर ये होसला ही है की
वो हमें..
आज तक.. हरा ना सकी..
-मृदुल


