हाँतुम मुझे याद बहुत आते हो.. 

बात बे-बातहर वक़्त

ख़यालों में आकर सताते हो

हाँतुम मुझे याद बहुत आते हो.. 


मोड़ा था मैंने मुँह तुम से

याद है मुझेमगर क्यूँ?

ना पूछते होना कुछ अपनी बताते हो 

हाँतुम मुझे याद बहुत आते हो.. 


कुछ थीं मेरी भी मजबूरी

नहीं रख पा रहा था जज़्बातों से दूरी,

सवाल उठे तुम परलगा गैर ज़रूरी

पर अब कौन सुने,   दिल तुम किसे बताते हो?

हाँतुम मुझे याद बहुत आते हो.. 


सोचा तुम्हें फिर किसी रोज़ समझा लूँगा

दिल खोल कर अपनासारे एहसास दिखा दूँगा,

साथ बीते वक्त का सिला देएक बार फिर माना लूँगा.. 

पर तुम अब ना साथ चलते होना हाथ मिलाते हो

हाँतुम मुझे याद बहुत आते हो.. 


सोचा ना थातुम यूँ हमें अतीत बना लोगे,

संग गुजरी सदियों को लम्हों में भुला दोगे..

एक बार ना मूड कर देखा तुमनेके कोई बात हो,

हाँतुम मुझे याद बहुत आते हो.. 


आवाज़ें देता रहा में बहुत देर तलक

खेरजनता हूँतुम गुजरे वक्त सी प्रीत निभाते हो

ज़िंदगी भर ना मिलने की अब क़समें खाते हो,

हाँतुम मुझे याद बहुत आते हो.. 


क़समें तो वो भी थीकिसी रोज़,

जो शब्दों में बाँध दीं थी तुमने,

देखें अब किन क़समों को याद रखते होऔर कौनसी- कौनसी भूलाते हो.. 

हाँतुम मुझे याद बहुत आते हो.. 


चलो समझा लूँगा इस दिल को,

साथ यहीं तक था शायद अपना

तुम दूर रह कर शायद ज़्यादा ख़ुश रह पाते हो.. 

हाँतुम मुझे याद बहुत आते हो..


मैं शायद जगह बना नहीं पाया

तेरी जिम्मेदारियाँ भरी ज़िंदगी में,

मगर तुम अब भी मेरे दिल की धड़कन कहलाते हो,

हाँतुम मुझे याद बहुत आते हो..


कभी ज़िंदगी में मिले ना हों, हम भले,

मगर इस दिल के सारे तार,

जाने अब भी कैसे छेड़ जाते हो..

हाँ तुम मुझे याद बहुत आते हो..


भुला भी कैसे दूँतुमको

हर वक्त सामने ही तो नज़र आते हो,

मंद सी मुस्कान बिख़ेरउसी तरह आज भी शर्माते हो,

आज भी प्रोफ़ायल फ़ोटो बदल-बदल मन को बहलाते हो..

हाँ तुम मुझे याद बहुत आते हो..

-मृदुल