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गुनाह!


मोहब्बत के मारे को... ऐसे ना देखोख़ता ही नहीं... हम गुनाह कर चुके है।

ख़ता ही तो की थी... के दिल दे दिया थामगर तुझको देना... गुनाह हो गया।

— मृदुल
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