दोस्त मेरे

मुझको बता 

दोस्ती की है हमने

या की है ख़ता


फँस चुकें है 

कश्मकश में

है नहीं दिल 

मेरे बस में


चाहता हूँ 

तुझको पाना

ढूँढता हूँ 

इक बहना 


दिल से चाहूँ 

जान तुझको

फिर ये मन 

कहता है मुझको


दोस्त ही हूँ 

जान” तेरा

मैं नहीं 

अरमान तेरा


फिर भी दिल 

माने ना बातें

करता रहता 

तेरी यादें


दर्दे दिल से 

मैं तड़पता

दर्दे दिल की 

तू दवा दे 


इंतज़ारे हद 

बता दे

जो भी हो 

अब सच बता दे


दोस्ती और 

प्रेम के 

फ़ासले में 

मैं खड़ा हूँ


यार मेरे 

तू मुझे 

काम से काम 

इक रास्ता दे


वक़्त का है 

गर तक़ाज़ा

मुझको दे 

इक वास्ता सा


इंतज़ार करता 

रहूँगा

जान मेरी 

मैं जुदा सा 


सोचने गर

वक़्त चाहे

जान मेरी 

ले तो चाहे


जोंदगी हैं 

तेरी ख़ातिर

चाँद महीने 

वक़्त क्या है


 मेरे 

अरमान तुझ बिन

दिल ये मेरा 

विरक़्र्ग्त सा हे

-मृदुल