मुझे पढ़ते रहनाथी उनकी ये आदत..

के शायद बुरी थीबदल दी गयी है..


लीखों सिर्फ़ मुझ परथी मन में वो हसरत..

के हसरत बुरी थीबदल दी गयी है..


हर इक हर्फ़ तेरा बायाँ होवो चाहत..

के चाहत बुरी थीबदल दी गयी है..


लिखा जोछुपा लो सभी सेये फ़ितरत.. 

के फ़ितरत बुरी थीबदल दी गयी है..


मैं पहले पढ़ूँगीहमेशा उनकी वो हठ...

के वो हठ बुरी थीबदल दी गयी है..


ना ज़िक्र हो कहीं पररक़ीबों कीये ज़िद..

के वो ज़िद बुरी थीबदल दी गयी है..


उन्हें सोच लिखनाथी मेरी हक़ीक़त..

हक़ीक़त बुरी थीबदल दी गयी है..


वो फ़ोटो जो मेरी सुहाती थी तुमको..

वो फ़ोटो हमारी बदल दी गयी है..


हर इक चीज़ जो तेरी यादें दिलाती.. 

वो सारी की सारी बदल दी गयीं हैं..


मेरे साथ होतेजो होती ये क़िस्मत..

के क़िस्मत बुरी थीबदल दी गयी है..

-मृदुल