अब जो तुम मिले हो, तो क्या मिले हो?
काश हम कुछ पहले मिले होते..
अब उम्र का जो आधा सफ़र है..
सो जब कट चुका है..
दिल में अरसों जो छुपा रखा था..
वो सब बट चुका है..
नए वादे नहीं करता हूँ,
बहुत टूटते देखे है..
नए रिश्ते नहीं गड़ता हूँ,
बहुत छूटते देखे है..
मुरझाती सी अधूरी हँसी..
उधार ले, अब बाँट रहा हूँ..
बची है जो ये ज़िंदगी..
बस साँस लिए काट रहा हूँ..
इसे जीना कह लो, जो गर तुम चाहो..
बस अक्स रह गया है अब.. सो उसे..
छाँट रहा हूँ..काट रहा हूँ.. बाँट रहा हूँ..
-मृदुल


