ऐ दिल - देखले उठ रही तेरी अर्थी
तू आसूँ बहाए ये उनकी है मर्ज़ी
ज़ख़्म तेरे क़िस्से कहानी हुए है
के होंठों पे रस की निशानी हुए है
के आँखों का पानी बना इक लतीफ़ा
है हस्ती सी तुझ पर खुदा की ख़ुदाई
के जाने क्यों तुमने मुहब्बत बनाईं
दिया मुझको दिल, उसमें धड़कन क्यों देदी
किया ही क्यों क़ाबिल मोहब्बत करे दिल?
मोहब्बत भी दी तो मिलाया क्यों उनसे?
मिलाया तो मिलकर जुदा क्यों हुए??
मिलाया तो मिलकर जुदा क्यों हुए??
-मृदुल


