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३-हमारी कश्मकश - (दिलों-दिमाग़ के बीच की वार्तालाप का फ़लसफ़ा)..३


३..

सम्भले थे,संभलते होंगे..

सम्भले थे,संभलते होंगे..

मचले थे,मचलते होंगे..

कौन सा मोज़े ऊलफ़्त में पड़ बैठे है?

जो फूँक-फूँक कर,कदम चलते होंगे....४

— मृदुल
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