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२-हमारी कश्मकश - (दिलों-दिमाग़ के बीच की वार्तालाप का फ़लसफ़ा)..२


२..बुलाया था,बुलाते होंगे..

बुलाया था,बुलाते होंगे..

मुस्कुराया था,मुस्कुराते होंगे..

कौन सी हमसे आशिक़ी कर बैठे है?

बस यूँही,अपना मन बहलाते होंगे....३

— मृदुल
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