अग्रसर अग्रगामी हूँ बिना किसी आराम के
निरंतर ही चलता हूँ बिना किसी विराम के
अपने रास्ते का अंतिम गन्तव्य हूँ मैं
बेशक माहौल जंगली है, परंतु सभ्य हूँ मैं
अपने अन्तस का आखिरी मंतव्य हूँ मैं
सादगी के साथ भी अत्यन्त ही भव्य हूँ मैं
चन्द्र सा उजला हूँ मैं ढलती हुई शाम में
मैं अल्लाह में, मैं इसा में, मैं ही हूँ राम में
तपता हुआ सुर्य हूँ, ज़िन्दगी का घाम हूँ
मैं वर्णों में धवल हूँ, मैं ही तो श्याम हूँ
जीने के लिए जीने की ज़िद पर अड़ा हूँ मैं
मौत से अक्सर ही जीने के लिए लड़ा हूँ मैं
अनंत की खोज में शुन्य पर खड़ा हूँ मैं
ज़िंदगी से कह दो कि मौत से बड़ा हूँ मैं
~मयस्सर


