दिल में जज़्बात और होठों पर इज़हार रखता हूँ,
सर आँखों पर तुमसे किया,बेइंतहां प्यार रखता हूँ।
तुम्हारी याद में बीते पलों का,साप्ताहिक विवरण नहीं,
मन के पन्नों पे छपता दैनिक अखबार रखता हूँ।
मुहब्बत-ए-गुलिस्तां में फूल तो सभी सहेजते हैं,
मैं सीने से लगाकर भी,कांटो का हार रखता हूँ।
कामयाबी से मुखातिब नहीं भी हूँ तो क्या,
कोशिशों का जुनून दिल में अपार रखता हूँ!
तुमसे रूबरू होने की तलब सदा रहती है,
मन बहलाने को ,नज़रों में तुम्हारा इंतज़ार रखता हूँ।