वक्त बीत ता गया

मैं मिट ता गया


कल को छोड़ता गया

आज को जीत ता गया

जो मिला सो ठीक

गर नही तो बढ़ता गया


वक्त बीत ता गया

मैं मिट ता गया


सोचा रहेगा कुछ साथ

लेकिन वक्त सब छीन ता गया

रोज़ मुलाकात होती खुदसे

सोचू झूठ बोलू या सच खुद से

लेकिन आइना सब दिखाता गया

मैं फिर भी झूठ बोलता गया


वक्त बीत ता गया

मैं मिट ता गया


न रुका न मुड़ा

बस चलता गया

लफ्ज़ कभी मिले कभी नहीं

मेरा गीत बनता गया


वक्त बीत ता गया

मैं मिट ता गया