ओ मेरे
ओ मेरे प्यारे कुसुम
कौन है जो तुम में यों झलकता है
कौन है जो तुम में यों रंग भरता है
किसकी चमक से तुम चमकते हो
मेरा मन भी तुम सा आलोकित होना चाहता है
तुम सा निर्दोष, निश्छल, अकपट बन ना चाहता है
अनगिनत बदबू से भरा मैं
तुम सी सुगंध चाहता है


ओ मेरे
ओ मेरे प्यारे कुसुम
कौन है जो तुम में यों झलकता है
कौन है जो तुम में यों रंग भरता है
किसकी चमक से तुम चमकते हो
मेरा मन भी तुम सा आलोकित होना चाहता है
तुम सा निर्दोष, निश्छल, अकपट बन ना चाहता है
अनगिनत बदबू से भरा मैं
तुम सी सुगंध चाहता है