
तुमने लौ को छुआ
वह माणिक बन गई
बेशुमार मनके
तुम्हारी मुट्ठी में सिमटते चले गए
मुझे बहुत देर बाद पता चला
कि दरअसल
लौ से तुम्हारे हाथ जल गए थे
तुमने जले पोर मुझसे छिपाने को
मुट्ठियां बन्द कर ली थीं .... !
उस दिन
Read More! Earn More! Learn More!
