उस दिन जब तुमने
जो पत्थर उछाला आकाश की तरफ
तुम्हारे स्पर्श की नियति थी
या कि उस पत्थर की
वह हवा में ही फूल बन गया
बहुत देर बाद
जब वह पत्थर नीचे गिरा
उस पर तुम्हारे खून के धब्बे थे ....!
सिहर गया हूं कि
आज छू लिया तुमने मुझे
मुझे तुम्हारे हाथ देखने हैं, अभी, इसी वक्त ... !


