पंख थक गए अब मेरे डेनो में अब जान नहीं है,जिससे सांस उलझा रही थी उससे अब पहचान नहीं है,वक्त बदलते दुनिया बदली परिजनों में सम्मान नहीं है,अब मुझसे कहते हैं 'राही' तुझसे तो पहचान नहीं है।जॉन फ़ज़ल मसीह
पंख थक गए अब मेरे डेनो में अब जान नहीं है,जिससे सांस उलझा रही थी उससे अब पहचान नहीं है,वक्त बदलते दुनिया बदली परिजनों में सम्मान नहीं है,अब मुझसे कहते हैं 'राही' तुझसे तो पहचान नहीं है।
जॉन फ़ज़ल मसीह