Poetry 1 min read 413.6K reads

मेरा


मैं रोता रहा उसके लिए जो मेरा कभी था ही नहीं,जो बन सकता था मेरा उनसे मैं फिर मिला ही नहीं।

फिर जो ढली जिंदगी की शाम तो बीता सब याद आया,जो हक से था मेरा वह अब रहा ही नहीं।।

। कलम –ए–राख ।

Read more Earn more Learn more