आज फिर पाया मैंने कुछ खास है,
फिर भी मेरा दिल बहुत उदास है।
दिल करता है कि दौड़ कर जाऊँ,
खोलू घर का दरवाज़ा और पुकारूँ तुम्हें।
हाथ में थामकर तुम्हारे, इक और जीत,
फिर देखूँ तुम्हारे चेहरे के भावों को बदलते हुए।
अब सब कुछ मानो जैसे अधूरा सा है,
हँसी चेहरे पर, दिल कहीं सुना सा है।
तुम्हारे जाने से "माँ" जैसे सब चला गया,
समय जैसे मेरे लिए अब ठहर गया।
दिन निकलता है फिर रात आ जाती है,
तुम्हारे हर एक बात याद आ जाती है।
जैसे-तैसे खड़ा हूँ मैं खुद को जोड़ कर,
बस ज़रा से इंतज़ार कर के मैं आता हूँ।

