क्या कहूँ, अच्छा हूँ, खराब हूँ मैं,
जो भी हूँ आपका इंतखाब (चुना हुआ) हूँ मैं

बच न पाएगा आप तपिश से मेरी,
आप महताब है तो आफ़ताब हूँ मैं

मैं था कल भी ज़ाहिर-ओ-बातिन,
आज भी एक खुली किताब हूँ मैं

आप ने बस एक सवाल पूछा था,
जवाब ये है के, अब भी 'लजवाब' हूँ मैं।