जब मैं टूटा तो हल्की सी आवाज़ आई थी,जब मैं बिखरा, तो चारो तरफ तन्हाई थी,यू तो अब भी ज़िंदो की जमीन पर हूं,वो, जब जिंदगी, मेरी कब्र से गुजरी तो मुस्कुराई थी।।। राही ।।
जब मैं टूटा तो हल्की सी आवाज़ आई थी,जब मैं बिखरा, तो चारो तरफ तन्हाई थी,
यू तो अब भी ज़िंदो की जमीन पर हूं,वो, जब जिंदगी, मेरी कब्र से गुजरी तो मुस्कुराई थी।।। राही ।।