न लिखी किताबों की लौथो पर,कि इंकलाब आएगा,उठ खड़ा हो निकल सर्द रातों,में कि इंकलाब तू ही है।। कलम–ए–राख।
न लिखी किताबों की लौथो पर,कि इंकलाब आएगा,
उठ खड़ा हो निकल सर्द रातों,में कि इंकलाब तू ही है।
। कलम–ए–राख।