Poetry 1 min read 432K reads

दोस्त


ज़िन्दगी समुन्दर हुई तो दोस्त नाव हो गये ,जब मैं धूप में निकला तो दोस्त छांव हो गये।

लड़खड़ा के गिरा ही था गम की बैसाखियों से,जो मेने उठ के देखा तो दोस्त पाव हो गये।

Read more Earn more Learn more