ज़िन्दगी समुन्दर हुई तो दोस्त नाव हो गये ,जब मैं धूप में निकला तो दोस्त छांव हो गये।लड़खड़ा के गिरा ही था गम की बैसाखियों से,जो मेने उठ के देखा तो दोस्त पाव हो गये।
ज़िन्दगी समुन्दर हुई तो दोस्त नाव हो गये ,जब मैं धूप में निकला तो दोस्त छांव हो गये।
लड़खड़ा के गिरा ही था गम की बैसाखियों से,जो मेने उठ के देखा तो दोस्त पाव हो गये।