वो कहते है ये शहर नहीं तुम्हारा है,पर यहां मेरा एक छोटा सा आशियाना है,मेरे पूरखे यही की मिट्टी में सोए है,यहीं की मिट्टी में मुझे भी सौ जाना है।। कलम–ए–राख ।
वो कहते है ये शहर नहीं तुम्हारा है,पर यहां मेरा एक छोटा सा आशियाना है,
मेरे पूरखे यही की मिट्टी में सोए है,यहीं की मिट्टी में मुझे भी सौ जाना है।
। कलम–ए–राख ।