Poetry 1 min read 241.5K reads

बंटवारा


इस बेरुखी दुनिया में सम्भल के चल,यहां पैरों के जूते ही काट लेते है,

खड़े करते है आशियाने जिनके हम उमर भर,अक्सर वही बच्चे, हमारा आशिया, बाट लेते है।

#~कलम–ए–राख#partetion

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