इस बेरुखी दुनिया में सम्भल के चल,यहां पैरों के जूते ही काट लेते है,खड़े करते है आशियाने जिनके हम उमर भर,अक्सर वही बच्चे, हमारा आशिया, बाट लेते है।#~कलम–ए–राख#partetion
इस बेरुखी दुनिया में सम्भल के चल,यहां पैरों के जूते ही काट लेते है,
खड़े करते है आशियाने जिनके हम उमर भर,अक्सर वही बच्चे, हमारा आशिया, बाट लेते है।
#~कलम–ए–राख#partetion