**पापा**
एक बच्चे के रूप में,
और बाद में बड़े होने पर भी,
मैंने हमेशा एक कद्दावर आदमी की,
भगवान की तरह सराहना की,
वह मेरे पापा थे,
मैंने आसमान में उड़ान भरी,
ऊंची चोटियों, पहाड़ियों पर गया,
लेकिन मैं कभी भी उस ऊंचाई को,
महसूस नहीं कर सका,
जो अपने बचपन में,
अपने पापा के,
कंधों पर बैठने पर महसूस की,
एक बेटे के लिए,दुनिया में कोई भी,
सहारा शायद,पापा से मजबूत नहीं।
-ब्रिगेडियर मनोज कुमार सिंह यादव
