तमाम सियासत लेकर संग, नेता जी की उड़ी पतंग । एक दूजे को काटे छाटें, आसमान में सर-सर भागे ।
देखो पंचर सायकल आया, साथ में लंगड़ा हाथी लाया। भगवा पतंग से वो घबराया । ये गौरक्षक है या कुछ और, डर के बादल हैं घनघोर।
आसमान में मच गया शोर, बड़ी पतंग पर लिखा है चोर । जाने किसके हाथ में फिरकी , जाने किसके हाथ में डोर ।
राफेल की शकल बनाकर , पेंच फंस गया कहाँ से आकर । मित्रों भागूं मैं किस ओर, पप्पू पकड़े कसके डोर ।
मोटा भाई रह गया दंग, मामा जी की कटी पतंग । महाराज के हाथ में फिरकी , कमलनाथ के हाथ में डोर ।
19 तक मैं ढील न दूँगा , तुझको मैं न हिलने दूँगा । चाहे कितना लगा ले जोर , ये दिल भैया मांगे मोर ।


