वक्त की रेत पर
पड़े हुए निशान,
भूत भविष्य वर्तमान
ये जमीन ये आसमान
जिसने रचा सारा जहाँन
वो माँ . . .
जो सिखाती है कि
सभी अपने हैं,
जिसके आँखों में मेरे सपने हैं
जो गलतियाँ करने पर
डाटती है फटकारती है ,
जो प्यार से दुलारती है !
जिसका प्यार शक्कर से भी मीठा है,
सिर्फ माँ सच बाकी सब झुठा है !
. . .जिंदगी के दौर में
जिसने हर दर्द सहा
जिसने हमेशा कहा ,
“ कभी खुशी कभी ग़म ,तर रम पम पम “ !
जिसने अपने आंसुओं को छिपा कर ,
हमे हँसना सिखाया
जिसने उंगली पकड़ कर
हमे चलना सिखाया !
जिसके सफेद बाल कहतें हैं
बदलते वक्त की कहानी ,
कभी दादी कभी नानी !
न जाने कितने रिश्ते कितने रूप है
जननी सचमुच देवी स्वरुप है !
बचपन से यौवन ,मेरा संपूर्ण जीवन
मेरी कविता के हर एक शब्द कृतज्ञ हैं !
दुनिया में सबसे खुबसूरत अगर कुछ है
तो वो है मेरी माँ ….
और उसका हँसता हुआ चेहरा
जिसे देखकर मैं
खुश हो जाता हूँ ,
और अपने के सरे ग़म भूल जाता हूँ !
माँ है तो सबकुछ मेरे पास है ..
जिसके बिना ये जीवन अधूरा हैं
“उदास है ,
जो सबसे किमती
सबसे खास है
मेरी माँ . . . .