तो फिरछू लेने दोइन ग़मगीन आँखों को,जिसने छिपा रखे थेदर्द-ए-दिल सदियों से !और छू लेने दोउन खामोश लबों कोजिनमें बंद हैकुछ पुराने किस्सेकुछ अधूरी ख्वाहिशें..