Poetry 1 min read 598.4K reads

बात उन दिनों की


ये बातउन दिनों की है..जब ग़ुलाबकिताबों में खिला करते थे,ज़माने के डर सेहम सिर्फख्वाबों में मिला करते थे !औररात की तन्हाई मेंचाँद से गिला करते थे !ये बातउन दिनों की है..

Read more Earn more Learn more