ये बातउन दिनों की है..जब ग़ुलाबकिताबों में खिला करते थे,ज़माने के डर सेहम सिर्फख्वाबों में मिला करते थे !औररात की तन्हाई मेंचाँद से गिला करते थे !ये बातउन दिनों की है..