हिन्द क्षितिज का ध्रुवतारा सबकी आँखों का वो न्यारा, वो भारत माँ का लाल दुलारा आज अमर है आज अमर है ।   अश्रु शेष और शेष समर है, अभी शेष संघर्ष हमारा । वो भारत माँ का लाल दुलारा, आज अमर है आज अमर है ।   --   जनसेवा में प्राण समर्पित मातृभूमि में जीवन अर्पित, जो तृप्त करे बनकर गंगा की धारा आज अमर है आज अमर है ।   उर में धधकी वो आग प्रखर है, नतमस्तक हो मृत्यु भी हारा । वो भारत माँ का लाल दुलारा, आज अमर है आज अमर है ।   --   मन का आँगन अब सूना है तम का प्रकोप अब दूना है । घोर अँधेरे से लड़ता जो उजियारा, आज अमर है आज अमर है ।   निशा शेष और शेष प्रहार है, अभी शेष है लक्ष्य हमारा । वो भारत माँ का लाल दुलारा, आज अमर है आज अमर है ।   --   फिर से नव पल्लव आएंगे बगिया के सुमन मुस्कायेंगे, फिर से गूंजेगा गीत चमन में प्यारा अमर आग है आग अमर हैं ।   स्वप्न शेष और कठिन डगर है, पर अभी अटल विश्वास हमारा। वो भारत माँ का लाल दुलारा, आज अमर है आज अमर है ।