अगर कर लो जो तुम अपनी क़ाबिलियत पर यक़ीं,
आकर कामयाबी ख़ुद तुम्हारे क़दम चूम लेगी।
इस जहां में मौजूद हर एक ज़िंदा-दार शय,
ईमा हर एक काम से पहले सिर्फ़ तुम से लेगी।
उस हिमालय को जो घमंड है अपने ऊंचे क़द पर,
ऊंचाई देख तुम्हारे कामयाबी की उसे शर्मिंदगी होगी।
ऋण सी जो ये ज़िंदगी लगती है तुम्हें अपनी हर पल,
एक लम्हा में बेहतर होकर ख़ूबसूरत लगने लगेगी।
ऐसे ही तो नहीं कहते रहें बुज़ुर्ग हमें हर वक्त,
ओस सा साफ़ किरदार हो तो वो ज़रूर चमकेगी।
और अगर तुम अपने हर ग़म भुला कर आगे बढ़ोगे,
अंधेरे से भी तुम्हें हमेशा एक रौशनी मिलेगी।
अ: हर परेशानी तुम्हें बहुत छोटी लगेगी।
*ईमा- इजाज़त
Maroof Aftab
