अहम वेग टकराती लहरें,

मौन किनारों का अभिनन्दन।

तट से सीखो साथ निभाना,

क्यूं क्षण भंगुर में करते क्रंदन।।


जब नाद हुआ मेघों का गर्जन,

कहीं बाढ़ त्रासदी कहीं झूमे उपवन।

पर जल की महिमा जग जन जाने,

तृष्णा में बरसो बन नीर संजीवन।।


पग ठोकर पाते राहों के पाहन,

पर तीर्थ हुए पत्थर के ही पूजन।

अख्यात रूप भी पाए ख्याति,

जब तप अग्नि में चमके कुंदन।।


निशा भोर हर क्षण तू झेला,

मनन छोड़ है कर्म की बेला।

पंच तत्व का पुतला जय हो,

सुख दुख का हो सम आलिंगन।।


- मानवेन्द्र सिंह राना