फेंक दो उन गद्दारों को गैर-ए-जमी ,मासूम-ए-कातिलों का जो गुणगान करते हों।खूनी कौम-ए-शान में जो उठाते हैं सर ,फैसला उनका मजलूम-ए -आवाम करने दो।।
फेंक दो उन गद्दारों को गैर-ए-जमी ,मासूम-ए-कातिलों का जो गुणगान करते हों।
खूनी कौम-ए-शान में जो उठाते हैं सर ,फैसला उनका मजलूम-ए -आवाम करने दो।।