कालचक्र अब घूमा है
ये परिवर्तन की बेला है
दीपक भी साथ चले हैं
सूर्य न अब अकेला है।
हवाएं-बादल काँप रहे हैं
मिलकर चक्रवात बन आए
सूर्य की दीपक से पुकार है
अब ज्योति ज्वाला बन जाए।
मौन तेरा ऐसे समय में
कायरता का परिचायक है
राम-युधिष्ठिर की धरती पर
यह दृश्य बड़ा दुखदायक है।
महाभारत का नाद हुआ है
अब एक ओर को होना होगा
धर्म-अधर्म में चुनकर बढ़ना
विजयी धर्म को होना होगा।
श्वान शृगाल सब एक हुए हैं
ललकार रहे हैं द्वार खड़े
गौ से अब सिंह बन जा
कर प्राणघातक प्रहार कड़े।
सदियों बाद है अवसर आया
अब तो भीतर स्वाभिमान जगा
शिवा-राणा-गोविंद के अंशों को
क्षितिज से पुकार रहा भगवा।
भ्रांति व छल का जाल बिछा है
यह चक्रव्यूह भी तोड़ना होगा
शिवा के वंश को शिव की भांति
अब तीसरा नेत्र खोलना होगा।
सियार-कुकुर का जो झुंड खड़ा
तेरे गर्जन से ही मर जाएगा
तू राम पर विश्वास तो कर
फिर राम राज्य भी आएगा।
