टूटी  उमीदें नाकाम  दोस्ती तुम  नहीं  बदलोगे सिर्फ  मेरी  सोच  थी मुझे  की  है ये  सजा खुदा  ने  मुकर्रर मैंने  जो  खायी  थी  वो कसम  जो  तोड़  दी बचता  रहा  हु  जिस रस्ते  से  बार  बार खुद  ही  मैंने  किस्मत उस  तरफ  मोड़   दी इलज़ाम  चाहते  हो  देना तुम  हमें  बेवफाई  का तो लो   तालुकात  की  ये डोर  हमने  ही  छोड़  दी तुम  जाओगे    तो  आएगा ना कोई  दोस्त  ज़िन्दगी  में अभिनव  गीत  बनेगा  आखिरी बाद  उसके  कलम  ही  तोड़  दी