वो माँ ही है जिसे मेरी बात का बुरा नहीं लगता..

वो माँ ही है जिसकी बात कभी बुरी नहीं होती ||


लाख कोशिश कर ले दुनिया में कोई मगर..

दूध के कर्ज से कोई संतान कभी उरी नहीं होती ||


मैं अकेला नहीं चलता कभी,

माँ की दुआ मेरे साथ चलती है ||


आज भी इम्तिहान को निकलता हूँ जब..

दही-चीनी लिए दरवाज़े पर मेरी माँ मिलती है ||


मेरी मुश्किलों को माँ कुछ ऐसे संभाल लेती है..

मेरी बलाएँ ले लेती है, कुछ नज़र उतार देती है ||


बुलंदियों को छूने की मुझमें उड़ान भर देती है..

जब मेरे सर पे माँ बस हाथ फेर देती है ||


खुदा भी उसके सामने छोटा लगने लगता है,

जब माँ दुआ देने को अपना हाथ उठाती है ||


डर नहीं है दुनिया मे अगर सैलाब भी आ जाए..

मुझे आँचल में छिपा लेगी अगर मेरी माँ आ जाए ||