किसी चेहरे की मायूसी ने ये एहसास दिलाया है..
उसे हँसाने की मेरी कोशिश, बेकार है, जाया है..
है गर शक तुझे मेरी वफा पर तो आज तू सुन ले,
तेरे अँखियों के आँसू ने मेरे चेहेरे को रूलाया है..
खुदी को खो के अपनी हमने आखिर क्या पाया है
तुझे पाने की कोशिश में हमने खुद को भी गवाँया है
कभी इक बार तो तू इस कदर खुलके मिले हमसे
हमें भी एहसास हो जाए कि कुछ अच्छा ही पाया है
तेरी मेरी कहानी को भँवर जब गुनगुनाते हैं,
लम्हें तेरे संग रहने के मुझे तब याद आते हैं,
दिल की पीड़ से मेरे अभी दुनिया नहीं वाकिफ..
हो आँसू आँख में फिर भी सामने मुस्कराते हैं..


