बस वही जो था दरम्याँ हया का परदा,
उसने उठने न दिया हमने गिरने न दिया
खामोशी में बीत गई रैन ये मुलाकात की,
उसने कहने न दिया हमने सुनने न दिया
लिखना पढ़ना भी ठहरा रहा एेब में अपनी,
उसने लिखने न दिया हमने पढ़ने न दिया
रहे अपनी कोशिश में वो भी हम भी,
उसने हँसने न दिया हमने रोने न दिया
एक हसरत थी उनको लेकर दिल में मगर,
उसने पाने न दिया हमने खोने न दिया
हो गया सौदा दिल का नज़रों से उस रात,
उनसे लौटाया न गया हमसे माँगा न गया