आज जब भी तुझे याद करता हूँ
सोचता हूँ काश हम मिले होते
पल दो पल सही जिभर कर देख लिये होते
भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी से वक़्त निकाल कर
सोचता हूँ काश हम मिले होते
हो सकता कि कुछ तुम पढ़ती कुछ हम पढ़ते
गिले-शिकवे दूर कर एक-दुसरे को समझ पाते
सोचता हूँ काश हम मिले होते
घडी दो घड़ी रुक कर कुछ पल साथ बिताये होते
कुछ किस्से तूने कहे होते कुछ किस्से मैंने कहे होते
किस्सों किस्सों में मुस्कुराते हुए
तनहाइयों को दूर करते हुए
नज़दीकियों को बढ़ाते हुए
एक दूसरे के करीब आये होते
सोचता हूँ काश हम मिले होते
मलाल उम्र भर रहेगा तुम समझ लिये होते
सोचता हूँ काश हम मिले होते!!
~ मानसु मीना


