उसने कहा कि मुझ पर भी कुछ लिखो ना..

क्या लिखूँ उस हसीन चेहरे की तारीफ़ में, 

की डर लगता है कहीं स्याही खत्म ना हो जाये...

क्या लिखूँ उसकी शख्सियत पर की उसे मुझसे और दुनिया को उससे इश्क़ हो जाये...

क्या लिखूँ उस नासमझ पर की उसे मेरी मोहब्बत समझ आ जाये...

तुम ही बताओ क्या लिखूँ उस पर, 

सिर्फ़ लिख कर कैसे इबादत करते हैं खुदा की, 

यूं की वो ही दुआ पूरी करने वाला और वो ही दुआ बन जाये...

क्या लिखूँ?