देखो हरियाली का दिन आया है ,
खुशहाली कैसी लायी है ।
नई कलियों का जन्म हुआ ,
फूलों में नया उमंग खिला ।
सूर्य की लालिमा को पाकर ,
वृक्षों ने घटा लहराई है ।
देखो हरियाली का दिन आया है ।
बसंत ऋतु की खूबसूरती देख ,
चांद ने भी मुस्कान बिखेरी है ।
देखो हरियाली का दिन आया है,
खुशहाली कैसी लाई है ।
जीवन में क्या रीति सजी है ,
जोड़ी जोड़ा खूब जमी है ।
एक फूल दो कांटे भी ,
अपने को समझे प्यासे जी ।
बहन हवा चली हर हर सी,
उपवन में डोर बजे झर झर सी ।
कलियां तो कलियां भी ही झूमे ,
झूमे साथ-साथ घर गलियां भी ।
देखो हरियाली का दिन आया है ,
खुशहाली कैसी लाई है।।