भले झगड़ लिया करो

पर चुप ना रहा करो


झगड़ोगे, रूठोगे तो मनाने भी आ जाएँगे

जो रहोगे चुप तो कैसे समझ पाएँगे ?


एक वैसे ही पढ़ने में कच्चे रहे है

पर फ़िक्र ना करो ज़ुबान के हम बचपन से सच्चे रहें है