शिकवे मिटाने मैं आया हूँ,

तुम कहो तो सही, मैं सुन में आया हूँ


बस, इतना ग़र मैंने कह दिया होता तो

आज रुसवा ना तुम होते ना मैं होता


पर क्या करें समय भी मजबूर कर जाता है

कहना तो बहुत कुछ होता है पर, समय चुप करा जाता है


फिर समय समय पर तुमको मुझसे और मुझको तुमसे हुआ शिकवा, वक़्त याद दिलाता है !