माँ,


कहाँ कोई दिन मनाने को कहती है?

वो तो अपने बच्चों की ख़ुशी में ख़ुश रहती है.


उसे कहाँ फ़र्क़ पड़ता तुम रविवार को मनाओ या सोमवार को मनाओ mothers day

उसकी सातों दिन किचन चालू रहती है


ख़ुद खाए ना खाए

तुम खाओ ध्यान से

उसपर नज़र रखती है

अरे पगले! तुम्हारे खाने पर नहीं,

तुम्हारा पेट ठीक से भरा या नहीं 

उसकी ख़बर रखती है


यह तो अभी शुरू हुए हैं चोंचले

उसकी कहाँ यह चाह होती है

तुम मनाओ ना मनाओ ये डे

माँ तो माँ होती है


सबसे पहले जगती है

सबसे अंत में सोती है

ख़ुद अपना ख़याल करे ना करे

पर पूरे परिवार का ख़याल करती है


माँ कहाँ कोई दिन मनाने को कहती है

वो तो बस परिवार की ख़ुशियों में ख़ुश रहती है !