पहचान लोगे मेरी खामोशियों में दर्द को

बस इसीलिए बेहिसाब बातें किया करता हूँ


ज़ख़्म तो है मेरे भी दिल पर

पर तुम्हें इल्म ना हो इसलिए चेहरे पर मुस्कुराहट बरकरार रखता हूँ !