इज़हार करने के तरीक़े हज़ार थे,
बस इज़हार करना आसान ना था
उन्हें इश्क़ हो जाना, उपरवाले की मर्ज़ी थी
मचलते अरमानों को रोकना, यूँ आसान ना था
डरते थे इश्क़ का रोग हो ना जाए
पर कमबख़्त ज़ोर जब चलना चाहिए दिल पर, चला ना था
अब जब हो ही गया दिल उनका
तो कर देना ही था, इज़हार ए इश्क़
इसे रोकना अब आसान ना था !


