बगावत के सुर किलकारी से शुरू हुर्इ जिंदगी, अब गुमनाम सी हो गई जिंदगी, जिसकी सांसों में आती थी खुशबू तेरी, अब वो सांस की डोरी टूट गई मेरी, जीना था तेरे साथ जिंदगी भर, पर पल भर में ये दूनिया रूठ गई, अब उस पार कुछ मालूम नहीं, बस अब चलना है कितना और