बंदिशों को तोड़ दो
रुख हवाओं का मोड़ दो
तुम तो हो एक उड़ते परिंदे
इस जहां को ये बोल दो...
कैसी फिक्र ...कैसी उलझन
इन्हें अब छोड़ दो...
मैं हूँ.... हाँ मैं ही हूँ...
इस जहाँ को ये बोल दो...
खुद से जो तुम जीत गए तो
जीत तुम्हारी निश्चित है
फिर चाहे कोई भी हो रण
अभिषेक तुम्हारा निश्चित है
आगे बढ़कर कदम बढ़ाओ
दीवारों को तोड़ दो
मैं हूं ....हां ...मैं ही हूं
इस जहां को ये बोल दो
इस जहां को ये बोल दो...
जय हिंद ...जय भारत..


